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लखनऊ: बाजार से सीधे जुडेंगे बनारस के बुनकर

वाराणसी के पारंपारिक हथकरघा क्षेत्र में लगे कई बुनकरों को जिंदगी में नई राह दिखने की संभावना है। टॆ॓क्स्टाइल कमेटी के इंटिग्रेटेड हैंडलूम क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचसीडीपी) के तहत वाराणासी हैंडलूम क्लस्टर के दायरे में आने वाले ५,००० बुनकरों को उत्पादकता बढा़ने के लिए जरुरी उपाय और प्रशिक्षण मुहैया कराया जा रहा है। वाराणसी क्लस्टर उन २० हघकरघा क्लस्टरों में से एक है जिनकी बर्ष २००५ - ०६ में कपडा़ मंत्रालय द्वारा क्षमता निर्माण समर्थन, बाजार विकास के दृष्टिकोण, तकनीकी और संस्थागत विकास के लिए पहचान की गई थी। सभी क्लस्टरों के लिए ४० करोड रुपये की लागत के साथ इस योजना के दायरे में कच्चे माल की आपूर्ति, विपणन समर्थन, डिजाइन इनपूट, प्रौद्योगिकी के उन्नयन और बुनकरों के कल्याण के लिए प्रत्येक क्लस्टर में हथकरघा क्षेत्र को सभी जरुरतों को लाया जाएगा। इंडियन इंस्टीट्यूट आँफ हैंडलूम टेक्नोलाँजी (आईआईएचटी) और परियोजना के समन्वयक प्रमोद श्रीवास्तव ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, उत्पाद पोर्टफोलिओ का विविधिकरण समय की मांग है। अब बनारसी साड़ी से आगे बढ़ने और अन्य उपयोगी वस्तुओं में प्रयोग करने का समय आ गया है। उन्होने कहा, फिलहाल हम कोटवा, रामनगर और लोहता में रहने वाले ५००० बुनकरों को इस कार्यक्रम के दायरे में ला रहे है। अपने सतत प्रयास की वजह से हम फैब इंडिया और अन्य बडी़ कंपनियो से ठेके हासिल करने में सफल रहे है जिसके परिणामस्वरुप बुनकरों की आमदनी में भी सुधार हुआ है। वाराणसी में और इसके आसपास तकरीबन एक लाख हथकरघा बुनकर है। वाराणसी हैंडलूम क्लस्टर का मुख्य उत्पाद साडी़ है और इसका दबदबा अभी भी कयम है। उत्पादन के कुल मुल्य में साडी़ की भागीदारी अनुमानित रुप से १० फीसदी से लेकर ९५ फीसदी है। उन्होंने कहा, पारंपारिक कढा़ई वाली साडियों की मांग में कमी आई है। बुनकरों को खरीदांरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपनी डिजाइन, उत्पादों और लागत नियंत्रण के साथ प्रयोग करने की जरुरत है। उन्होने कहा, वैश्विक बाजार में फर्नीशिंग उत्पादों और अन्य फैशनेबल ड्रेस मैटोरियल के संदर्भ में ये उत्पाद मजबूत स्थिति बनाए हुए है। लेकिन फिलहाल ये बेहद कम मात्रा में निर्मित किए जा रहे है। परियोजना के तहत नेटवर्किंग सिस्टम को मजबूत प्रदान करने के उद्देश्य से खरीदार विक्रेता सम्मेलन और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होने कहा कि हम ऎसी प्रदर्शनियों के जरिये ४ लाख रुपये तक के आँर्डर हासिल करने में सक्षम है। श्रीवास्तव ने बताया, हथकरघा क्षेत्र के लिए न सिर्फ वित्तीय रियायत जारी रखे जाने की जरुरत है। बल्कि उत्पादन के आधुनिकीकरण, धागे, डाई और रसायनों आदि की उचित मुल्य पर नियमित आपूर्ति और डिजाइन एवं बुनाई के नए पैटर्न में प्रशिक्षण के लिए संस्थागत समर्थन भी जरूरी है।
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