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मुंबई: कपास का समर्थन मूल्य ४० फीसदी बढाएगी सरकार

केंद्र सरकार २००८-२००९ के कपास सीजन के लिए इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में ४० फीसदी का इजाफा कर सकती है। ऎसे समय में जब ९ अगस्त को समाप्त हप्ते में महंगाई की दर १२.६३ फिसदी पर पहुंच गई है, एमएसपी बढाने का सरकारी फैसला ४५ अरब डाँलर के घरेलू टैक्सटाइल उद्दोग के लीए मुसीबत खडी कर सकता है। कपडा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंड्रर्ड को बताया कि मध्यम दर्जे की लंबाई बाले कपास का न्यूनतम सर्मथन मूल्य वर्तमान मे। १९०० रुपये प्रति क्किंट्ल के मुकाबले २५०० रुपये प्रति क्विंट्ल की जा सकती है। इसी तरह लंबे कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य वर्तमान में २०३० रुपये प्रतिक्विंटल के मुकाबले ३००० रुपये प्रति क्विंटल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले कपास की कीमंते काफी सख्त हो गई थी, उस हिसाब से कपास का एमएसपी कम लग सकता है। घरेलू बाजार में अक्टूबर २००७ में कपास (शंकर वेरायटी) की कीमत २० हजार रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी = ३५६ किलो) थी, जो जुलाई में बढकर २८३०० रुपये प्रति कैंडी पहुंच गई। इस तरह इसमें ४१.५ फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। कृषि लागत एवं कीमत आयोग कच्चे कपास के दी वेरायटी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश करता है। इसमें पहला है मेध्यम दर्ज का कपास जिसकी लंबाई २५ एमएम से २७ एमएम तक होती है जबकि दूसरी वेरायटी की लंबाई २७.५ से ३२ एमएम तक होती है। न्यूनतम सम्रर्थन मूल्य क फैसला करते समय कपास उगाने की लागत और किसानों के मुनाफे का ध्यान रखा जात है। २००७-२००८ में देश में ३१५ लाख बेल्स (एक बेल्स =१७० किलो) कपास का उत्पादन हूआ जबकि इससे एक साल पहले यानी २००६-२००७ में २८० लाख बेल्स कपास का उत्पादन हुआ था। अमेरिका में कपास की बुआई क्षेत्र में कमी और अंतरराष्टीय बाजार में बढती मांग के चलते देश से कपास निर्यात में काफी उछाल दर्ज किया गया। कपास निर्यात का लक्ष्य ८५ लाख बेल्स का था, लेकिन यह १ करोड बेलल्स को पार कर गया। यही वजह है कि कपास वर्तमान सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में कपास की कीमतें इस साल सातवें आसमान पर पहुंच गई।
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