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लखनऊ: नन्हे हाथों में कालीन के साथ-साथ कलम

सारे देश मे बाल श्रम पर बंदी लगाई जा रही हे। उत्तर प्रदेश में बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए नई पहल की जा रही है। कालीन उद्दोग में अनुचित बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए श्रम मंत्रालय (भारत सरकार) और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के साथ मिलकर राज्य के भदोही और मिर्जापुर जिले के करीब सौ गांवो में बाल श्रमिकों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष अशोक जैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बताया, इस कदम का मुख्य उद्देश कारीगरों के बीच कौशल विकास को बढावा देना और उनके परिवार के उन सदस्यों को जो भविष्य में कालीन कला को अपना पेशा बनाना चाहते है। इस पहल के तहत बच्चों के पढाई जारी रखने के साथ साथ उन कार्यक्रमॊं में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।जैन ने बताया, कालीन कला को सीखने के लिए हमें नई पीढी को प्रोत्साहित करना चाहिए लेकिन उनकें पढाई में बिना किसी बाधा उत्पन्न किए हुए। यह तभी संभव है जब हम उन्हे कौशल प्रगति के साथ-साथ बेहतर शिक्षा मुहैया भी कराएंगे। उल्लेखनीय है कि सीईपीसी राज्य भर में ऎसे १६ विद्दालयों का संचालन करती है जो कारीगरों के बच्चों को शिक्षा मुहैया कराती है। इन कार्यक्रमॊं के अलावा, संगठन ने करघाओं की स्थिति के निरीक्षण के लिए नियमित रुप से दौरा करने और कालीन उद्दोग से संबधित आंकडे, इक्ठ्ठा करने का भी फैसला किया है। जैन ने उम्मीद जताई कि अमेरिकी सरकार वरीयाताओं की सामान्यीकृत प्रणाली (जीएसपी) के तहत भारत की विभिन्न श्रेणी की कालीनों के शुल्क मुक्त प्रवेश को जारी रखएगी। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी सरकार इन क्षेत्रों में बाम श्रम के इस्तेमाल की समीक्षा करने के बाद ही इस तरह का फायदा मुहैया कराती है।
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