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नई दिल्ली: बारिश के कारण कपास पर कीटाणुओंका हमला

मानसून के आने से सभी जगह प्रसन्नता का माहोल है। धान किसानों के दिल खुशी से झूम रहे है, लेकिन कपास उत्पादकॊं की नींद हराम हो गई है। बारिश के बाद नमी बढने से कपास की फसलॊं पर कीटाणुओं ने हमला बोल दिया है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर समय रहते ही कुछ किया नही गया तो भारत दूसरे स्थान से फिसल कर तीसरे स्थान पर जा सकता है। इस साल भारत ने कपास उत्पादन में अमेरिका को पछाड दूसरा स्थान हासिल किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समस्त कीट प्रबंधन (आईपीएम) ही कपास कि फसल को बचाने का एकमात्र उपाय है। मुंबई के माटुंगा स्थित केंद्रीय कपास प्रौद्दॊगिकी अनूसंधान संस्थान के वैज्ञानिक (वरिष्ठ श्रेणी) चित्रनायक सिन्हा के मुताबिक, भारत में १० लाख हेक्टेयर जमीन पर कपास की खेती की जाती है। इनमें से २५-३० फीसदी जगहॊं पर कीट प्रबंधन के कोई उपाय नही है। बारिश के बाद मौसम खुलने से और आद्र्ता बढने से कपास में लगने वाले कीटाणु काफी सक्रिय हो जाता है। पंजाब और महाराष्ट में इस प्रकार के कीटाणुओं के लगने की शिकायत मिलनी शुरु हो गई है। पंजाब में मुख्य रुप से मिली बग नामक कीटांणु तो अन्य जगहों पर जेसेड, व्हाइट प्लू व ऎफॆड नामक कीटाणु इस मौसम में कपास की फसल को बर्बाद करते है। वे केहते है कि निर्यात प्रोत्साहन के कारण पिछले पांच सालों मे भारत में कपास का उत्पादन दोगना हो गया है। २००७-०८ के दौरान भारत में कपास का उत्पादन ३१० लाख बेल (१ बेल=१७० किलोग्राम) रहा और अगले साल इसके उत्पादन में और बढोतरी की उम्मीद है। लेकिन समय रहते इन कीटाणुओं को नही रोका गया, तो उत्पादन स्तर प्रभावित हो सकता है। वर्ष २००७-०८ के दौरान गुजरात में सबसे अधिक ११० लाख बेल कपास का उत्पादन हुआ। दुसरे व तीसरे स्थान पर रहने वाले महाराष्ट में ६० लाख बेल तो पंजाब में २४ लाख बेल कपास का उत्पादन हुआ। लुधियान स्थित पंजाब कृषि विश्चविद्दालय (पीएयु) के कीटनाशक विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछ्ले साल भी पंजाब के कई जिलॊं मे मिली बग नामक कीटाणिओं ने कपास को फसल पर हमले बोल दिए थे। इस साल फिर से कई जगहों पर इन कीटाणुओं को देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इन कीटाणुऒं से बचने के लिए कीटनाशक के साथ किसानों को कपास के खेत के पास ज्वार, बाजरा व मक्के की फसल उगानी चाहिए। सिन्हा के मुताबिक मिली बग को मारने के लिए किसानों को स्पाइरोटेक्ट्र्मैट नामक कीटनाशक का इस्तेमाल करना चाहिए।
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