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मुंबई: ग्रीव्स काँट्न कंपनी की कृषि क्षेत्र पर नजर()खेती पहले हल हे सहारे की जाती थी। उसके लिये समय भी बहुत लगता था। धिरे धिरे देश कि प्रगति के साथ कृषि उद्दोग मे भी बदलाव आया, हल के जगह ट्रँक्टर ने ले ली, खेति करना आसान हो गया। इन इंजिनोसे कम मेहनत मे जादा उत्पादन होने लगा। कृषि उद्दोग मे तेजी से इंजनो कि मांग बढती गई। इन मांगो को ध्यान मे रखकर इंजन और निर्माण उपकरण निर्माता कंपनी ग्रीव्स काँटन इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने की योजना बना रही है। यह कंपनी पहले भी इस क्षेत्र के लिए उत्पादन तैयार कर चुकी है। कंपनी पम्पसेट, पावर टाइलर्स और अन्य तरह के इस्तेमाल के लिए १ और ४ हाँर्स पावर क्षमता के बीच की रेंज के इंजन बनाती है। जून, २००७ तक १२ महीनों के लिए इंजनो की १,२१५.८ करोड रुपये की कुल बिक्री में कृषि क्षेत्र का योगदान ८.४ फीसदी था। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि इस खंड में अगले कुछ वर्षो के लिए कंपनी ने उत्साहवर्ध्दक वृध्दि का लक्ष्य रखा है। लेकिन इन अधिकारियों ने इस बारे में और कुछ कहने से इनकार कर दिया। कंपनी ने हाल ही में जर्मनी की बुख- फैरीमैन डीजल कंपनी को कलपुर्जों की आपूर्ति शुरु की है। ग्रीव्स काँटन ने इस जर्मन कंपनी का पिछ्ले वर्ष अधिग्रहण किया था। ग्रीव्स काँटन के प्रबंध निदेशक प्रवीण सचदेअव ने कहा, ’हम अपने वैश्विक अधिग्रहण प्रक्रिया के साथ संचालन और विपणन कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’ कंपनी हाल ही में तैयार किए गए अपने टिवन इंजन सिलेंडर की आपूर्ति के लिए कई आँटोमोबाइल कंपनीयों से बातचीत कर रही है। अगस्त, २००७ में ग्रीव्स काँटन ने इन इंजनों के लिए औरंगाबाद में नई इकाईयां शुरु की थी। | |
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