Textile Resource for the textile industry - textile associations, hosiery, sewn products, fabric converting, garment-trim, bobbin threads, circular knit fabrics, textile consulting

 Welcome Guest. Please RegisterLogin
HomeArticlesNewsMachineryDirectoryBuy-n-SellFashionFeatures हिंदी समाचार RegisterLogin
See Coverage of Lakme Fashion Week - Autumn/Winter 2008
BharatTextile.com > हिंदी समाचार (Hindi Textile News)
 

लखनऊ: भदोही के कालीन पे छाई कालिछाया

()

विश्च बाजार मे अपनी पकड बनी रखने के लिये उत्तर प्रदेश के भदोही जिले आज कही समस्याओ से जुझ रहे है। १९६४ ने शुरु हुए कालीन उद्दोग ने दिन दुनी रात चौगनी तरक्की कर देश और विदेशो मे पैर पसार लिये थे। शुरुआती दिनोमें कलीन उद्दोग मे एक परिवार के बच्चो से लेकर बुढे तक सभी काम किया करते थे। आज इस परंपरा को संजोए रखाना मुश्कील हो रहा है। आज ये स्थिती मे बच्चो से काम करवाना सामाजिक अपराध माना जाता है। जिसके तहेत सजा के डर के कारन लीन उद्दोग आज परिवार का उद्दोग नही रहा है। आज यह उद्दोग कूछ ही निर्यातको तक सिमट कर रह गया है। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के अध्यक्ष शौकत अली अंसारी ने बताया कि विश्च विख्यात भदोही कालीन उद्दोग के प्रति केन्द्र और राज्य सरकारों की बेरुखी के साथ ही ढांचागत सुविधाओ कें अभाव एवं वैट लगाने से छोटी पुंजी वाले कालीन निर्माताओ के सामने गंभीर सकंट खडा हो गया है। इसके परिणाम आज निर्यात करने वाला हि ठेकेदार बन गया है। और इसका लाभ विदेशी कंपनियां उठा रही है। अंसारी ने बताया के कभी भेदोही मे कालीन के १२०० निर्यातक हुआ करते थे। लेकिन सरकारों की बेरुखी और ढांचागत सुविधाओ के कमी के कारण आज मात्र १०० कालीन निर्यातक रह गए है। उन्होने बताया कि वर्ष १९६४ में ४६१ करोड रुपये से शूरु हुए कलीन उद्दोग का निर्यात वर्ष २००७-२००८ में ४,००० कारोड तक पहूच गया है। लेकिन जहा २५ लाख बुनकर काम कर रहे थे तभी हात से बूने जाने वाले कालीन कि अलग पहचान हुआ करती थी। वहा आधूनिक मशीनों के कारण अब पाच लाख ही बुनकर काम करते है जिसके तहेत हे पहचान कम होती जा रही है। पहले निर्यात के लिये बनने वाले कालीनो में ७५ प्रतिशत का योगदान श्रमिक का होता था और २५ प्रतिशत योगदान कच्चे माल का होता था। पर अब मशीनी करण के कारण सिर्फ २५ प्रतिशत श्रमिक का योगदान रह गया है। इसका परिणाम भदोही जिले के बुनकरो पर हो रहा है। भारतीय कालीन निर्माता संघ के पुर्व महासचिव रवि पाटोडिया ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार पर खुला आरोप लगाया कि सरकार की सूची में कुटीर उद्दोग कही नही दिखाई देता। हस्तशिल्प हस्तकला जैसे उद्दोगों को बढावा देने के बजाय सरकार केवल बडे उद्दोग को ध्यान मे रखकर निर्यात परक उद्दोग पर वैट लगाने की योजनाये बना रही है। इक समय मे ८५ प्रतीशत कालीन निर्यात भदोही से होता था। अब यह घटकर ५० प्रतिशत रह गया है। इसके लिए सरकार की नितियों को दोषी मानते है। हम उस दौर को वापस लाने के लिये ढांचा गत विकास को प्राथमिकता देकर योजना बनायेंगे। पटोडिया ने कहा कि पश्चिम के बाजार की शोभा, ट्प्टैट, गाने ट्र्न्टो, तिब्बति, मैगी डिझाइन बुनाई करने में कम समय लगाता है। इसी का फायदा उठाकर युरोपीय फर्म काईकिया ने पूरे भदोही पर कब्जा जमा लिया है। भदोही में बनने वाली कालीन पर आधा हिस्सा उसी का होता है। इस फर्म के चलते कई कालीन निर्यातक अब केवल ठेकेदार की भूमिका निभा रहे ह। कलीन का सबसे बडा खरीदार अमेरिका हुआ करता था। डालर के अवमूल्यन के चलते कालीन निर्यातक वसीम ताहिर ने बतायाकी अमेरिका को निर्यात कम होता जा रहा है वही यूरोपीय देशों का निर्यात बढ रहा है। इंडियन इन्ट्रीट्यूट आंफ कार्पेट टेक्नोलाजी के डायरेक्टर के के गोस्वामी का मानना है कि फैशन के बदलते दौर में हर रोज नई डिजाइनें आ रही है। निर्यातको को चाहिए कि नई कलात्मक डिजाइनों को बनाने पर भी जोर दे। कलीन निर्यात संवर्धन परिषद के सहायक निदेशक विजय कूमार सिंह ने बताया कि भदोही से होने वाले कुल निर्यात का २५ प्रतिशत भारत तिब्बती क्वालिटी कालीन है। वर्ष २००६- ०७ में पुरे भारत से कालीन का कूल निर्यात ३६७४ करोड ८६ लाख रुपए का हुआ इसमें उत्तर प्रदेश का ४६.६ प्रतिशत हिस्सा है। लगभग ४०० करोड रुपए का भारत तिब्बती कालीन निर्यात किया गया। इस वर्ष २०० से ३०० करोड रुपए की मांग बढने की पूरी संभावना है। वर्ष २००७ - ०८ में निर्यात ४००० करोड रुपए का आकडा पार कर जाएगा।

This news requires a unicode font to be installed on your system.

Home Buy Sell Articles Newsroom Statistics Fashion Machinery Fibre Dictionary Glossary Register Free Join BharatTextile.com My BharatTextile हिंदी समाचार
About usTerms & ConditionsDisclaimerPrivacy policy • 13-05-08
Secure Payment Processing by Internet Wizards © - 2000-2008. Kan-Softek Solutions Pvt. Ltd. All rights reserved.