BharatTextile.com > हिंदी समाचार (Hindi Textile News)
 

मुंबई: सूल्जर्स के बाद अब प्रोसेस इकाइयों के तेवर भी आसमान पर

(बी. टी. संवाददाता)

फिनिश स्तर कपडा उद्योग में यद्यपि मायूसी छायी हुई हैं किन्तु इससे जुङे उत्पादन एवं प्रोसेस क्षेत्र में इन दिनों तेवर तीखे ही दिखाई दे रहे हैं। कुछ दिन पुर्व सुल्जर्स इकाइयों की जॉब दरों में तेजी पनपी थी, अब प्रोसेस इकाइयों ने अपनी जॉब दरों में अकस्मात ही वृध्दि की घोषणा करके व्यापारियों को सकते में डाल दिया है। यह वृध्दि १० जुलाई २००७ से २५ पैसे प्रति मीटर लागू की गयी है।

पिछले सप्ताह नवी मुंबई टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एवं भिवंडी टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन द्वारा भिवंडी में संयुक्त बैठक बुलाई गयी थी, जहां जॉब दरें बढाने के अलावा उद्योग की अन्य कई समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया। उद्योग का कहना है कि आज कोयले की कम अपूर्ति एवं उसकी बढती किमतों से काफी परेशान है, जिसकी वजह से आयतित कोयले पर निर्भर रहना पङ रहा है, जो महंगा रहने से सभी के लिए संभव नहीं है।

भिवंडी टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद क्षेत्रपाल (प्रबंधक बोम्बे क्रिम्पर्स) ने बताया कि उद्योग में कङी भाव स्पर्धाओं के चलते पिछले ४ बरसो से जॉब दरों में वृध्दि नहीं हुई है, उचित दरें न मिल पाने के कारण कई प्रोसेस इकाइयों में तो ताले भी लग गये है एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्री जीतूभाई (प्रबंधक न्यू एम्पायर डाइंग) ने जानकारी देते हुए बताया कि आज कपङा क्षेत्र से जूङी इकाइयों में सरकार की आर्थिक रीढ होने के बावजूद भी उद्योग में प्रमुख स्थान रखने वाले प्रोसेस क्षेत्र को ढाचा गत सुविधाओं से अलग थलग रखा गया है उद्योग की सबसे बङी आवश्यकता है कोयला, और वही उचित मात्रा एवं समय पर उपलब्ध न होने से उद्योग को करोङों के घाटे से जूझना पङ रहा है। कोयला खदानों उद्योग की कोयला आपूर्ति को अंतिम हाशिये पर रखा गया है, जीतूभाई ने जानकारी देते हुए बताया कि खदानों में सर्वप्रथम आपूर्ति बिजली घरों के लिये रखी गयी है, दुसरे नंबर पर रेल्वे के लिए, तीसरे नंबर पर स्टील कारखानों के लिए, चौथे नंबर पर सरकारी प्रतिष्ठानों के लिये पांचवे नम्बर पर परमिट कोटा वालों के लिये तत्पश्चात छठवें अंतिम दौर में प्रोसेस इकाइयों के लिए उसमे भी सीमित आपूर्ति रखी गयी है, जिससे उद्योग की आवश्यकता कभी भी पुरी नही हो पाती, जिस वजह आयतित कोयले पर निर्भर रहना पङता है, जहां १५ से २० प्र.श. कीमत अधिक चुकानी पङती है। उजागर डाइंग के प्रबंधक श्री सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि समस्या यही समाप्त नहीं हो जाती, प्रत्येक शुक्रवार को १६ घंटे बिजली की सप्लाई बंद कर दी जाती है जिससे प्रति ईकाइ को वर्ष में सवा करोङ का नुकसान उठाना पङता है, मुंबई में ८० से भी अधिक प्रोसेसगृह थे, जिनकी संख्या आज ४० - ४५ तक ही रह गयी है, वही सूरत में ३०० से भी अधिक प्रोसेस हाऊस है, वहां इनके खुशहाली की वजह है सरकार द्वारा ढांचागत सुविधाओं को सहज ही उपलब्ध कराना, अगर मुंबई में महाराष्ट्र सरकार इस क्षेत्र की ओर ध्यान नहीं दिया तो यह उद्योग भविष्य में और भी पंगू हो जाएगा। आज कपङे की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रोसेस इकाइयों पर निर्भर है, जिससे निर्यात क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रोसेसिंग क्षेत्र ही निभा रहा है। देखा जाए तो कपडा उत्पादन में जिस तरह आधुनिकीकरण के लिए द्रुतगति लूमों की बाढ सी आई है उसी प्रकार प्रोसेसिंग क्षेत्र में आधुनिकीकरण अति आवश्यक है, लेकीन अभी तक इस क्षेत्र की अधिकांश इकाइयों में पुरानी मशिनों को ही ढोया जा रहा है। उद्योग का कहना है कि आधुनिकीकरण की बात तो दूर रही, यहां अभी तक ढाचांगत सुविधाओं को ही मुहैया कराने में सरकार सोयी हुई है।

कल्याण (एम आई डी सी) में तो पानी तक आज भी टैंकरों से मंगाया जाता है जब औद्योगिक जोन में स्थापित इकाइयों को सर्वप्रथम विद्युत, पानी की व्यवस्था प्राथमिक स्तर पर सरकार को करनी है, वहीं सडकों की जर्जर हालत पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

This news requires a unicode font to be installed on your system.

Home Articles Newsroom Statistics Fashion Machinery Fibre Dictionary Glossary Register Free Join BharatTextile.com My BharatTextile हिंदी समाचार
About usTerms & ConditionsDisclaimerPrivacy policy • 20-11-17
Website Design by InWiz © - 2000-2017. Inwiz. All rights reserved.