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मुंबई: ब्रांडेड इकाइयां निर्यात से रुझान हटाकर अब घरेलू क्षेत्र पर ध्यान दे रही हैं

(बी. टी. संवाददाता)

जनवरी २००५ से विश्वभर से कोटा समाप्त होने का लाभ भारतीय टेक्सटाइल और क्लोथिंग के निर्यात को हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकडों के अनुसार २००५ - ०६ में टेक्सटाइल और क्लोथिंग के निर्यात में २५ प्रतिशत की वृध्दि हुई थी परंतु उसके बाद माह में मात्र १० प्रतिशत निर्यात बढा है।

इयू एवं यूएस बाजार में भारत का निर्यात घटा है। यूएस टेक्सटाइल आयात आकङा दर्शाता है कि अक्टूबर - नवंबर, २००६ में भारतीय कपङा निर्यात ४.८ प्रतिशत बढकर ४०.४ करोङ डालर हुआ जबकि गत वर्ष के ११ माह में यूएस को कुल निर्यात ८ प्रतिशत बढकर ५११.८४ करोङ डालर हुआ तो गत वर्ष की समान अवधि में ४७३.१४ करोङ डालर हुआ जबकि डब्ल्यूटीओ के तहत चीन के निर्यात पर नियम लगाने के बावजूद इस अवधि में यूएसए को चीन का निर्यात १३ प्रतिशत बढा है। इयू बाजार में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है। भारत का इयू को निर्यात किमत पर १५.४ प्रतिशत बढा है जबकि मात्रा की दृष्टि से ८.४ प्रतिशत बढा है।

सरकारी सूत्रों का मानना है कि भारतीय कपङा निर्यात में हुई कमी अस्थायी है। कपडा आयुक्त जे. एस. सिंह ने हाल में कहा कि भारतीय कपङा उद्योग ने अपना ध्यान स्थानीय बाजार की ओर केंद्रित किया है। स्थानीय बाजार की वृध्दि दर गत वर्ष के ३ से ४ प्रतिशत से बढकर १० से १२ प्रतिशत हो गयी है। सभी निर्यातकों को कारोबार से हाथ नहीं धोना पङा है। गोकुलदास एक्सपोर्टस का निर्यात वर्तमान वर्ष के प्रथम ९ माह में १७ प्रतिशत बढा है। इसी तरह कपङा निर्यात के सभी विभागों का कामकाज नही घटा है। मेनमेड फाइबर, मेनमेड कपङा और मेडअप्स का निर्यात बढा है। दूसरी खुशी की बात यह है कि इयू बाजार में टेक्सटाइल निर्यात के यूनिट मुल्य प्रप्ति में वृध्दि हुई है।

वास्तव में कमजोर निर्यात कामकाज के मूल में देखे तो क्वालिटी प्रोडक्ट प्रदान करने की असमर्थता है। कोटा समाप्त होने से बाजारो में स्पर्धा बढ गयी है। श्रेष्ठत्तम इस स्पर्धा पर टिक सकेंगे और शेष बाहर निकल जायेंगे। इससे उद्योग एवं सरकार को सचेत होकर क्वालिटी में करने के कदम उठाने चाहिए। टेक्नोलोजी अपग्रेडेशन फंड यानि टीयूएफ स्कीम के तहत निवेश में आया उछाल सकारात्मक घटक है जो भावी निर्यात का उज्ज्वल चित्र दर्शाता है।

अप्रैल - सितम्बर २००६ की अवधि में निर्यात गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में १०.४ प्रतिशत बढा है। कोटन यार्न, कपङा, मेडअप्स का निर्यात ११.९ प्रतिशत बढा है। सिल्क यार्न कपङा और मेडअप का निर्यात घटा है। मानव निर्मित स्टेपल फाइबर का निर्यात ११० प्रतिशत बढा है। रेडीमेड गार्मेंट का निर्यात ९.२ प्रतिशत बढा है। कार्पेट के निर्यात में १४.८ प्रतिशत की वृध्दि हुई है।

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