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मुंबई: आधुनिक प्रशिक्षण एवं धनुधन के बावजूद खादी आज भी हाशिये पर क्यों है?

(मनीष पी. जादवानी)

केंद्र सरकार के कृषि और ग्रामीण उद्योग मंत्रालय के अधिनस्थ खादी तथा ग्रामीण उद्योग की अध्यक्षा कुमुदबेन जोशी ने पत्रकार परिषद में खादी के उपयोग और गांधी विचारधारा के घटते महत्व पर चिंता जताई। उन्होंने बताया की पिछ्ले कुछ वर्षों से भारत में खादी का उत्पादन, बिक्री और उपयोग में उल्लेखनीय कमी आयी है जिसके कारण रोजगार घटकर मात्र ६ लाख हो गये हैं अर्थात ९ लाख रोजगार घट गये हैं। अर्थात दुसरे काम में लग गये।

उन्होंने बताया कि विकसित स्पर्धात्मक युग के साथ खादी क्षेत्र में भी आधुनिकरण करने की जरुरत थी। नये और अधिक संख्या में चरखा - लूम्स बसाकर कारिगरों को देना चाहिए। खादी को स्पर्धा में खङा करने के लिए उसमें संशोधन, नई नई डिजाईनों, रंगो आदि का भी अमल करना पङे तो उसकी मार्केटिंग करने की व्यवस्था भी करनी चहिए। परंतु दुर्भाग्य से यह नहीं हो सका। जबकि इसके लिए केंद्र सरकार को अधिक मात्रा में वित्तीय फंड आंवटित करना चाहिए परंतु ऐसा भी नहीं हुआ। यह एक बात कारणभूत हैं, ऐसा बताया।

एक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि ३१ मार्च २००४ को भारत में ३५७८ जितनी खादी संस्थाएं कार्यरत थी जिनकी संख्या घटकर ३१ जुलाई २००६ को १९०८ हो गयी है अर्थात पांच वर्ष में १६७० खादी संस्थाएं बंद हो गयी है जिसके चलते खादी क्षेत्र में एक समय में १५-२५ लाख कारीगरों को रोजगार मिलते थे। यह संख्या आज घटकर ६ लाख हो गयी हैं उसकी बिक्री भी ७०० करोङ से घटकर ५०० करोङ हो गयी है जो एक चिंता क विषय है। जबकि कुमुदबेन ने खादी और ग्रामीण उद्योग आयोग की अध्यक्षा के रुप में हवाला २६ जुलाई २००६ को संभाला तो इसके बाद देश के कुछ राज्यों की विशेष मुलाकात लेकर खादी और इसके कर्मचारियों के प्रति विशेष खास सूचना हासिल नहीं की थी। इसके बाद उन्होंने खादी के कार्यक्रमों को गति देने के लिये और आगामी ३ वर्ष में २० लाख कर्मचारियों को रोजगार देने के लिये एक कार्यक्रम तैयार किया है और योजना आयोग के सदस्य डा. सैयदा हमीद के साथ तथा कृषी और ग्रामीण उद्योग मंत्रालय के मंत्रीयों के साथ चर्चाएं करके एक प्रति रोजगार १८००० रुपये के तौर पर ३६०० करोङ का प्रोजेक्ट रखा है और केंद्रीय मंत्रालय इस संदर्भ मे यथोचित कार्यवाही करने का सकारात्मक प्रतिभाव दिया, ऐसा उन्होंने बताया। कुमुदबेन ने आगे बताया कि खादी कमीशन अब खादी के कर्मचारियों को आधुनिक प्रशिक्षण देगा, साधन देगा, अत्याधुनिक लूम्स देगा और डिजाइनरों को भी रखेगा।

प्रादीप योजना : इसके लिए अमल में रखकर परंपरागत उद्योग के आधुनिकरण के लिए कृति - योजना अमल में रखकर और उद्योग शुरु करने से पहले सलाह देने के लिए ग्रामीण उद्योग सलाह केंद्र शुरु किया तथा २५ लाख तक के उद्योग के निवेशकों के लिए ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम भी अमल में रखा हैं और आगामी वर्ष में बाजार में खादी के कपङे में विभिन्न अत्याधुनिक वेरायटियां उपलब्ध रहेगी और अन्य कपङे की स्पर्धा में खङी रहेगी।

वर्तमान में कुल १९०८ संस्थाओ में सबसे अधिक संस्थाएं हाल में उत्तरप्रदेश में ४९४, दुसरे नंबर पर गुजरात में २१४ और तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल की २०१ खादी संस्थाए कार्यरत है। एक प्रश्न के जबाब में कुमुदबेन ने बताया कि खादी और ग्रामोद्योग कमिशन को अपने उत्पादनों कि बिक्री के लिये ब्राजील, स्पैन, पनामा, मे़क्सिको, दक्षिण अफ़्रिका, दक्षिण एशिया, इजिप्त, श्रीलंका, होंगकोंग, शन्घाइ, चीन जैसे देशों से आमन्त्रण मिलें है। एक सूचना देते हुए उन्होने बताया कि देशभर में खादी और ग्रामोद्योग के व्यापक और आधुनिक विकास के लिये उद्यमियोन्को विशेश तैयार करने के लिये नासिक में अपनि २६५ एकङ जमीन में खादि और ग्रामोद्योग महाविद्यालय शुरु करने पर विचार किया जा रहा है।

इसके लिए आइआइएम जैसी संस्थाओ के साथ परामर्श कर एक प्रोजेक्ट तैयार कर केन्द्र सरकार के समक्ष आगामी वर्ष में रखा जायेगा और इसका सकारात्म्क प्रतिभाव मिलेगा, ऐसा उन्होने बताया।

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