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मुंबई: अमरीका की नजर भारत के रिटेल व्यवसाय पर

(बी.टी. संवाददाता)

कपङा उद्योग को इस बार के सीजन से काफ़ी लम्बी उमीदें बंधी हुई है, जिसके चलते इस समय ग्रे स्तर पर लूम मालिकों के नखरे सर चढ कर बोल रहे है, वहीं खुद्रा व थोक में फ़िनिश कपङे की बिक्री शून्य बनी हुई है । जानकारों का मानना है वर्तमान मंदी का कोई भी विपरीत प्रभाव नहीं पङेगा, १५-२० दिनों में बाजार की स्थिति स्वत: ही सुधर जाएगी । खासकर इन दिनों निर्यात आर्डरों के आने से लूमों की जाब दरों में वृद्धि पनप चुकी है ।

इस बार ईद दीपावली से एक माह पूर्व आने से गल्फ़ देशों ने भी अग्रिम तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं जिसका प्रभाव बङे पैमाने पर आर्डर आने से दिखाई भी पङ रहा है ।

उधर अमरीकी बाजारों से भी विदेशी खरीदार काफ़ी सक्रिय हुए लगते है । जानकारों का कहना है कि अमरीकी व्यापारियों का चीन की ओर से मोह्भंग होने से उन्होने भारतीय बाजारों की ओर रूख किया है, जिससे अब वहां के बङे-बङे ब्रांडेड उत्पादक भारत में व्यापार स्थापित कर अपनी जगह बनाना चाहते है । उल्लेखनीय है अमेरिका में चीनी वस्त्र डंम्प होने से टेक्सटाइल के क्षेत्र में भीषण आर्थिक संकट खङा हो गया है, हालांकि अमरीकी सरकार ने उद्योग के प्रति W.T.O में सतत: प्रयास किये किये थे कि आयतित माल से उसका घरेलू उद्योग आहत न हो, लेकिन अब अमेरिका ने अपने देश के उधमियों को भारत में पूंजी निवेश के जरिये उकसाकर प्रसन्न कर लिया है, जिससे वहां टेक्सटाइल के क्षेत्र में पनपा आर्थिक संकट भी फ़िलहाल टल गया है, लेकिन भारतीय कपनियों के लिए एक समस्या यह भी है कि अमरीकी कंपनियां भारत में जहां भी अपना कारोबार स्थापित कर रही हैं, मुनाफ़े का बङा हिस्सा वही हङप रही है, लेकिन इतना अवश्य है कि बाजार प्रतिस्पर्धाओं का सामना कम से कम नहीं करना पङ रहा है, जिससे उत्पादन के बाद बिक्री जैसी समस्या का भय नहीं है। वहीं अमेरिका भारतीय रिटेल चैन को भी काफ़ी मुनाफ़े की दॄष्टि से देख रहा है जो इस समय भारत सहित अमरिका की भी सबसे बङी आवश्यकता है ।

फ़लत: भारतीय निर्यातकों ने अन्य मुद्दे (जैसे कि प्रतिस्पर्धा या चीन का उत्पादन) पर विचार करना ही छोङ दिया है । यही वजह है पिछले कुछ ही दिनों में निर्यात आर्डरों में वृद्धि होने से भारतीय लूम मालिकों के हौसले काफ़ी बुलंद हुए हैं। निर्यातकों का भी कहना है कि हमें तो अब आगे की रणनीति पर अपने बिक्री क्षेत्र को बढावा देना एवं निर्यात वृध्दि दर पर ही चिंता करनी है। विदेशी जानकारों ने भी इस बात से इंकार नहीं किया है कि टेक्सटाइल की कई किस्मों (टेरीटावेल वैल्यूएडीशन) में भारत विश्व में दुसरे दर्जे पर अपनी पकङ बना चुका है, क्योंकि देखा जा रहा है कि केवल अमेरिका ही नहीं दुनियां की कई ब्राडेंड कंपनियां भारत में अपनी इकाइयां स्थापित करने लगी है, जो स्पष्ट संकेत है भारत उनके लिए दुधारू गाय है ।

फ़लत: २००७ का वर्ष घरेलू व्यवसाय के साथ- साथ निर्यात व्यापार के लिए भी बेहतर माना जा रहा है ।

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