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मुंबई: जर्मनी की टेक्समेक इंडिया से भारत को नयी सीख मिलेगी

(संपादकीय)

यूरोप और एशियन राष्ट्रों के टेक्सटाइल मशीनरी का उत्पादन करने वाले उत्पादकों को कनफ़ेडरेशन आफ़ इंडियन टेक्सटाइल इंड्स्ट्री यानि सिटी के पूर्व चेयरमेन राजाराम जयपुरिया ने भारत में आकर भारतीयों के साथ संयुक्त उद्यम करने में अथवा अपनी स्वयं की यूनिटें स्थापित करने में निवेश करने के लिए विचार करने का ठेका दिया था जिससे भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की जरूरतों को पूरा किया जा सके ।

टेक्समेक इंडिया में २०० टेक्स मशीनरी उत्पादकों के प्रस्तुतकर्ताओं को संबोधित करते हुए जयपुरिया ने कहा कि भारत हाल में सरकार की लाभकारी और मददरूप नितियों से कभी न हुआ हो ऎसे विकास पथ पर आगे कूच कर रही है । जिसके पीछे देश की अर्थव्यवथा की सतत वृद्धि और द्विपक्षीय कोटा समाप्ति का समर्थक रहा है ।

विस्तरण, आधुनिकीकरण और ग्रीन फ़िल्ड प्रोजेक्ट द्वारा क्षमता बढाने में निवेश इतना अधिक बढता जा रहा है कि मात्रा और टेक्नोलोजी दोनों प्रकार से घरेलू मशीनरी उद्योग की बढती मांग के साथ ताल मिलने में भारी मुश्किल पङती थी ।

जबकि स्पीनिंग उद्योग भारत में आधुनिकीकरण में बङे पैमाने पर निवेश कर रहा था तब एकदम असंगठित फ़ेब्रिक्स और गार्मेंट उद्योग एकदम तेजी से संगठित प्रोड्क्सन यूनिटों में सुदॄढ हुआ था ।

हाल में भारत का स्पिनिंग, विविंग और प्रोसेसिंग उद्योग के लिए ज्यादातर इम्पोर्टेड मशीनरियों पर आधार रखता है । जो देश की लगभग ७० प्रतिशत मांग पूरी करता है, ऎसा जयपुरिया ने कहा ।

आज कुल टेक्सटाइल उद्योग का निर्यात ४० अरब डालर्स का है और वह २०१२ तक में लगभग ११० अरब डालर्स पर पहुंच जायेगा । जिसमें ६० अरब का निर्यात और बाकी के ७० अरब घरेलू उद्योग के रहेंगे । उद्घाटन सत्र के दौरान भारत के जर्मन दूतावास ने कहा कि जर्मन ने भारत को २१३ मिलियन यूरों की कीमत की टेक्सटाइल मशीनरी का निर्यात किया था।

उन्होनें ऎसा भी बताया कि इयू मार्केट भारतीय टेक्सटाइल एंड क्लोदिंग एक्सर्पोट के लिए भी एक बङा मार्केट माना जाता है । भारत ने इयू में १८ प्रतिशत जितनी वृद्धि दर्ज करायी थी जिसमें इयू और भारत के बीच जब द्विपक्षीय संधि साकार होगी तब निश्चित वृद्धि होगी, ऎसा माना जाता है। चार दिन के टेक्समेक इंडिया प्रदर्शनी में अंतराष्ट्रीय स्तर के १६० प्रर्द्शक थे जिसके सामने भारत से मात्र ४० प्रदर्शकों ने भाग लिया था । जर्मनी, इटली, ग्रेट ब्रिटेन, कोरिया और चीन के तमाम अग्रणी मशीनरी उत्पादकों ने टेक्समेक इंडिया प्रदर्शनी में भाग लिया था । मुलाकातियों की भी इसमें अच्छी भीङ रही थी ।

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