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मुबंई: सुल्जर्स इकाइयों की जाब दरों में वृध्दि

(मनीष पी. जादवानी)

स्थानीय थोक कपङा बाजार में तेजी मंदी का मिला-जुला रूख रहने से व्यापारियों के चेहरों पर रौनक कम ही दिखाई दे रही है। लेकिन आगामी तैयारियों के चलते ग्रे स्तर पर भरपूर प्रोग्राम बताए जाते हैं, लेकिन फ़िनिश स्तर पर लेवाली लगभग शांत है । खासकर कपङा उद्योग में देखा गया है कि मंदी के समय व्यापारियों में ब्रिकी के प्रति बैचेनी इतनी प्रवृत हो जाती है कि ऎसा प्रतीत होने लगता है कि शायद व्यापार अंतिम सांसे ले रहा है और ऊपर से आर्थिक तंगी के कारण भुगतान का दबाव और भी चिंतित किये रहता है । इस बार देशभर से प्रचंड गर्मी के समाचारों से भी प्रभावित हुआ है, भीषण गर्मी के कारण व्यापारी लम्बे सफ़र की दूरियों पर कम ही निकल रहे हैं, यद्यपि मौसम का मिजाज मुंबई में गर्म नहीं है तो ठंडा भी नहीं है, वैसे भी मानसून का प्रभाव मुबंई के व्यवसाय पर कम ही पङता है, बल्कि यहां बरसात के मौसम में व्यापार अधिक ही होता है। देसावरी व्यापारी मुबंई की बरसात का आनंद लेने के साथ-साथ खरीदी का भी प्रोग्राम बना लेते है। खासकर उत्तर भारत की मंडियों से अगले कुछ ही दिनों व्यापारियों का आगमन प्रारंभ हो जाएगा , जिसमें व्यापक खरीदी तो नही रहेगी लेकिन यूनीफ़ार्म वस्त्रों में बेहतर मांग रहेगी, ग्रे स्तर पर यूनीफ़ार्म का उत्पादन पूरा हो चुका है, फ़िनिश में मांग भरपूर है । उधर यार्न की सभी किस्मों में तेजी व्याप्त है जिसके चलते लूम मालिकों के नखरे आसमान पर हैं, इस बार सुल्जर्स लूमों में भरपूर प्रोग्रामों के आने से इनकी जाब दरों में भी तेजी आई है, जबकि जापानी चार शटल में स्थिति ठीक- ठीक है यहां जाब दरों में वृद्धि नहींवत ही है ।

निर्यात स्तर पर निरंतर वृद्धि होने से सुल्जर्स, रूटी एवं रेपियर्स लूमों पर आगामी दो महीनों तक भरपूर प्रोग्राम आने से घरेलू उत्पादको जाब दरें ऊंची चुकानी पङ रही है । बताया जाता है कि गल्फ़, यूरोपियन एवं एशिया के छोटे-छोटे देशों से भारतीय निर्यातकों को भरपूर प्रोग्राम मिले हैं । घरेलू क्षेत्रों में वर्चस्व रखने वाली इकाइयों में बाम्बे रेयान, रामाकृष्ण, अंगूरा, जी सी, प्रोम्पट, आर आर लीन ने भरपूर आर्डर प्राप्त किये हैं । इन निर्यातकों ने वैल्यूएडीशन फ़ेब्रिक्स में मुख्य सप्लायर्स के रूप में विश्व स्तर पर अपना महत्वपुर्ण बना लिया है । वैश्विक बाजारों में ग्राहकों की छोटी-छोटी पसंद को भारतीय निर्यातकों ने जिस प्रकार परख कर अपने उत्पादों की पेशकश की है, वैसी मांग चीन, कोरिया जैसे उत्पाद्क भारतीय उत्पादों की नकल करके भी पूरी नहीं कर पा रहे, प्रोसेसिंग से लेकर फ़िनिशिंग, लोजिस्टिक, मार्केट व्यूह, ब्रांड जैसी आवश्यकताओं की भारतीय नियार्तकों ने अपनी व्यूहात्मक कार्यवाहियों में शामिल कर नये सिरे से विदेशी बाजारों में अपनी बेहतर पैठ बना ली है ।

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